सरकारों के लिए ख़तरे की घंटी

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बढ़ती आबादी कम होते रोजगार निजीकरण बड़े-बड़े उद्योगपतियों को सरकारी संपत्तियों को सौंपना और सारी सरकारी नौकरियों को संविदा पर करना नेताओं के लिए घातक साबित हो गई , देश का युवा किसी हद तक जा सकता है सरकारों के लिए खतरे की घंटी है। युवाओं के अनुसार रोजगार स्थाई हो भर्ती पारदर्शी हो और सरकारी संपत्ति जनता के पास रहे , न्यायपालिका से न्याय मिले और चुनाव आयोग चुनाव निष्पक्ष कराए ।

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