बलिया का दुर्भाग्य/भाग्य -k.K.Singh

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बलिया का दुर्भाग्य
मौजूदा समय मे बलिया से पूरे 9 लोग हुकूमत में है जिन्हें बलिया की जनता ने देश और प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में बड़े ही नाजो से भेजा है।
इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष भी बलिया के ही है।
लोकसभा से सभापति भी बलिया के ही है।
भारतीय रेल के अध्यक्ष भी बलिया के ही है।
नीति आयोग से लेकर हर बड़ी संस्था में यहां के लोग हैं।
अब इनकी उपलब्धि यह है कि बलिया में एक भी अच्छा हॉस्पिटल नही है,रसड़ा विधानसभा को छोड़ दिया जाए तो एक भी अच्छी सड़क नही है।
एक अच्छा उच्च मानक का कॉलेज नही है।
एक चीनी मिल है जो कालांतर से बन्द है।
एक कटाई मिल था जिसे अब विधुत उपकेंद्र बना दिया गया।
इतने सारे लोगो के रहते हुए भी ‘कटहल नाला’ की एक तरफ से टूटी हुई पुलिया नही बन पाई, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?
शहर न डिवाइडर है, न कोई व्यवस्था।
हर जगह अतिक्रमण…
चौपट नगरपालिका है बजबजाती नालियां है।
ध्वस्त हुआ सीवरेज सिस्टम है।
पिछले वाले कार्यकाल मे नितिन गडकरी आये थे , वादा था कि रिंग रोड बनवा देंगे, ओवरब्रिज बनवा देंगे आदि आदि।
बना क्या?
इस बार तो ऐतिहासिक ‘ददरी मेला’ के अस्तित्व पर भी संकट है, जमीन पर प्लाटिंग वालो की नजर लग गयी, बहुत घर बन गए… 9 लोग मिलकर एक जमीन नही तलाश पाए…. मेला समाप्त!
इसी क्रम में आप कभी #रसड़ा विधानसभा के तरफ आइये.. चमचमाती सड़के,गाँव की सड़कें हो या जिला मुख्यालय की.. एकदम बढ़िया..
काम करने की नीयत होनी चाहिए..यहां के विधायक खुलकर लोगो की मदद भी करते है और काम भी।
रसड़ा नगरपालिका में घूम लीजिये…स्ट्रीट लाइट हो,नालियां हो या गलियां हो.. जबरजस्त काम हुआ है।
बलिया ने 9 लोगो को उच्च सदन में भेज कर क्या पाया?
जवाब है?
मैं कहता हूं आप सत्ता में रहकर खूब कमाइए, आपके पैसे में से जनता को सिस्सेदारी नही लेनी है, पर कुछ काम भी दिखना चाहिए।
बलिया के गंगा घाट पर रोज दाह-संस्कार होता है..जहां गंगा जी तो है पर घाट नही है।
बाहर से आये लोग कहते है कि यहां के नेता कैसे है?
अभी कार्तिक मास चल रहा है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन घाट पर अप्रत्याशित भीड़ होती है…पुरुषों की बात छोड़िए , स्नान कर रही महिलाओं के कपड़ा बदलने के लिए एक टिन शेड तक नही होता है।
अगर कुछ होता है तो महिलाओं को गिद्ध नजर से ताड़ती अनवांछित लोगो की नजरे होती है।
ये दर्जन भर लोग अगर एक-एक काम का संकल्प ले तो 5 साल में बलिया का कायाकल्प हो जाये?
एक लोग स्वास्थ्य सेवा के लिए संकल्पित हो जाये!
दूसरे लोग सड़क के लिए संकल्पित हो जाये!
तीसरे लोग नरक पालिका को गोद ले ले!
चौथे लोग शिक्षा के लिए प्रयासरत हो जाये!
पांचवे लोग बेरोजगारी पर काम करें!
छठवें लोग पेयजल,वन और पर्यावरण पर काम करें!सातवें लोग यातायात और नागरिक सुरक्षा पर काम करें!
आठवें लोग किसानों के उन्नत और कृषि में उनके उत्थान पर प्रयास करें!
नौवें लोग महिला सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर काम करें!
तो बलिया का भाग्योदय तय है…
पर क्या यह सम्भव है? नही!
क्योंकि यहां के नेता थानों पर पैरवी करने को ही अपना सबसे बड़ा कर्तव्य मानते है, एक पार्टी के होकर भी इनमें आपसी तालमेल न के बराबर है और यही सबसे बड़ा कारण है कि बलिया विकास से अछूता है।
कोई फायदा नही! ऐसे लोगो का।
एक ही दल के सभी लोगो को जिताना ही मूर्खता है! इससे अच्छा है कि हर विधानसभा में अलग अलग दल के लोग चुने जाए.. कम से कम काम कराने की प्रतिस्पर्धा तो रहेगी।
Thanks
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