समकालीन मुद्दों पर गीत लिखना सुनने से ज्यादा कठिन है- नेहा सिंह राठौर

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समकालीन मुद्दों पर गीत लिखना गीत सुनने से ज्यादा कठिन काम है और इसमें समय लगता है… इसके अलावा आजकल बिहार में जिस तरह की मेधावी पत्रकारिता हो रही है, उसको आधार बना कर तथ्यों की जांच पड़ताल किए बिना किसी मसले पर बोल देना लापरवाही भरा व्यवहार है.

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मैं मुद्दों को बेहद गंभीरता से समझे बिना प्रतिक्रिया नहीं देती, और एक गंभीर व्यक्ति से ऐसी ही उम्मीद की जानी चाहिए.

बाकी जिन लोगों को लगता है कि मेरे गीत एक खास समूह को लक्ष्य करते हैं, ये गीत उनको समर्पित रहेगा.

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