आधार कार्ड के लिए रात में ही डेरा जमाने की मजबूरी
आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था जब से बैंक और डाकघर के हवाले की गई है पूरा सिस्टम ही बिगड़ गया है। पूरे जिले में आधार कार्ड को लेकर हाहाकार मचा है मगर कोई जिम्मेदार सुनवाई करने को तैयार नहीं है। बैंक और डाकघर झंझट के चक्कर में बहानेबाजी से बाज नहीं आ रहे हैं। कभी मशीन खराब होने का बहाना तो कभी आपरेटर न आने की बात कहकर लोगों को टरका दिया जाता है।

जैसे तैसे आधार कार्ड बनने की जुगाड़ भी हो पाती तो इसमें टोकन का सिस्टम मुसीबत किए है। 20 और 30 से अधिक लोगों को टोकन नहीं दिए जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष से आधार कार्ड बनवाने की जिम्मेदारी डाकघर और बैंकों के हवाले की गई है। इस व्यवस्था से लोगों को सहूलियत तो नहंी मिली मुश्किल और खड़ी हो गई है। जब प्राइवेट स्तर पर पूर्व में व्यवस्था थी तो लोगों के आसानी से आधार कार्ड बन जाते थे। जरूरी कामकाज के लिए अब आधार कार्ड बनवाना आसान नहीं है। कई कई दिन चक्कर लगाने के बाद भी आधार कार्ड बनने की नौबत नहंी आ पाती है। जिले के डाकघरों का तो बुरा हाल है। बैंकों और डाकघरों के बाहर सुबह पांच बजे से ही लोग नए आधार कार्ड बनवाने, संशोधन करवाने को लेकर जुट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कुछ डाकघरों के बाहर लोग रात में पहले नंबर आने के चक्कर में डेरा डाल देते है। इसकी वजह है कि सुबह पांच-छह बजे आए तो नंबर आना भी मुश्किल है। क्योंकि बैंक और डाकघर कहीं पर 20 तो कहीं पर 30 ही टोकन दे रहे हैं। डाकघरों के अलावा बैंकों को भी आधार कार्ड का काम बेहद सिरदर्द मालुम पड़ता है। बैंकों में जहां पहले से ही ग्राहकों की भीड़ रहती है। ऐसे में बैंक स्तर से आधार कार्ड के काम को लेकर भी कोई रुचि नहीं ली जा रही है। शमसाबाद, राजेपुर,कायमगंज, नवाबगंज समेत विभिन्न क्षेत्रों में आधार कार्ड बनवाने और संशोधन को लेकर लोग भटक रहे हैं।
