सुनियोजित तरीके से भाजपा की केंद्र सरकार झारखंडियों के हक-अधिकार पर हमला कर रही है- मुख्यमंत्री
झारखंड से बिना पूछे यहाँ के कोयला खदानों की नीलामी शुरू करने की कोशिश की।

डीवीसी पर 5000 करोड़ का बकाया किया भाजपा की रघुबर सरकार ने, झारखंड को गिरवी रखा रघुबर सरकार ने और कोरोना काल में केंद्र सरकार ने रात के अंधेरे में झारखंड के 1400 करोड़ रुपये काट लिए। वहीं आंध्र प्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर 50 – 50 हज़ार से अधिक का बकाया है। झारखंड के लगभग 74000 करोड़ के केंद्रीय संस्थानों पर बकाया है पर इस पर भाजपा के नेताओं ने कभी आवाज़ नही उठायी।

इस पर भी केंद्र में बैठी भाजपा का मन नहीं भरा तो दुमका, पलामू, हज़ारीबाग़ के मेडिकल कॉलेजों की एनएमसी के माध्यम से मान्यता हटाने पर तुली है। झारखंड में AIIMS अभी बना भी नहीं है, मगर वहाँ मान्यता मिली हुई है। इसका क्या अर्थ है?
गरीबों-वंचितों पर भाजपा की यह कुदृष्टि इनकी हारी हुई मानसिकता दिखाती है।
हार से बौखलाई, डरी हुई भाजपा चाहे जो चाहे कर ले, मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे बच्चों की जिंदगी को हम ऐसे बर्बाद नहीं होने देंगे। अपने अधिकार के लिए जो भी जायज कदम उठाने होंगे, हम उठाएंगे। झारखंड ने संघर्ष करना सीखा है, अधिकार हम लेकर रहेंगे।
